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मांगेराम त्यागी बने राष्ट्रीय त्यागी भूमिहार महासभा के अध्यक्ष, अक्षु को युवा संगठन की कमान-बरला में सामाजिक चिंतन सम्मेलन में नशाखोरी, दहेज और शादी-विवाह में फिजूलखर्ची पर उठे सवाल, सामाजिक कुरीतियां दूर करने और युवाओं को संस्कारों से जोड़ने पर जोर

मुजफ्फरनगर। बरला गांव में रविवार को राष्ट्रीय त्यागी भूमिहार महासभा की ओर से आयोजित सामाजिक चिंतन सम्मेलन में समाज की समस्याओं और सुधार के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। सम्मेलन में किसान नेता चौधरी मांगेराम त्यागी को महासभा का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया गया, जबकि अक्षु त्यागी को युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। इससे पहले अक्षु त्यागी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। सम्मेलन में शादी-विवाह में फिजूलखर्ची, दहेज प्रथा, नशाखोरी, बेरोजगारी और तेरहवीं जैसे आयोजनों पर होने वाले अनावश्यक खर्च को सामाजिक चिंता का विषय बताया गया।
सम्मेलन में समाज को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाने के साथ युवाओं को संस्कारों से जोड़ने पर जोर दिया गया। आयोजकों की ओर से रखे गए दस प्रमुख चिंतन बिंदुओं में समाज की घटती जनसंख्या, युवाओं में बढ़ती नशाखोरी, बेरोजगार युवाओं को रोजगार, तलाक की बढ़ती प्रवृत्ति, दहेज प्रथा, तेरहवीं में फिजूलखर्ची, बच्चों को बेहतर शिक्षा और संस्कार देने जैसे विषय शामिल रहे। इसके अलावा यूजीसी, एससी-एसटी एक्ट और आर्थिक आधार पर आरक्षण जैसे मुद्दों पर भी विचार रखे गए। महासभा के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष अक्षु त्यागी ने कहा कि शादी-विवाह और दूसरे सामाजिक आयोजनों में दिखावे के लिए होने वाली फिजूलखर्ची के कारण कई परिवार कर्ज के बोझ तले दब जाते हैं। समाज को इस प्रवृत्ति से बाहर निकलकर सादगीपूर्ण आयोजन करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने युवाओं में बढ़ती नशाखोरी और संस्कारों की कमी पर चिंता जताते हुए परिवारों में बुजुर्गों और युवाओं के बीच संवाद बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। अक्षु त्यागी ने कहा कि समाज को मजबूत बनाए बिना राजनीतिक भागीदारी की बात अधूरी है। इसी उद्देश्य से उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी चौधरी मांगेराम त्यागी को सौंपने का निर्णय लिया, ताकि उनके अनुभव का लाभ लेकर सामाजिक सुधार की मुहिम को आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने यूजीसी और एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार से हस्तक्षेप की मांग की और कहा कि इन विषयों पर समाज की चिंताओं का समाधान किया जाना चाहिए। महासभा के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी मांगेराम त्यागी ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन के 32 वर्ष किसान-मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ने में लगाए हैं। अब समाज ने उन्हें नई जिम्मेदारी सौंपी है, जिसे वह पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाएंगे। उन्होंने सामाजिक सुधार की शुरुआत अपने परिवार से करने की बात कहते हुए बताया कि उनके चारों भाइयों की शादी बिना दहेज हुई और चारों शादियों में कुल 15,730 रुपये खर्च हुए। मांगेराम त्यागी ने कहा कि समाज में बदलाव लाने के लिए केवल भाषण देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपने व्यवहार और जीवन में भी आदर्श प्रस्तुत करने होंगे। उन्होंने अपनी मां के निधन के बाद होने वाले पारंपरिक आयोजन में भी फिजूलखर्ची नहीं करने और उस धन को समाज के हित में लगाने की घोषणा की। यूजीसी से जुड़े मुद्दे पर उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव के बजाय आपसी भाईचारे, समानता और मित्रता को बढ़ावा मिलना चाहिए। सपा नेता पुष्पेंद्र उर्फ बॉबी त्यागी ने कहा कि समाज के आयोजन केवल राजनीतिक चर्चाओं तक सीमित नहीं रहने चाहिए। सामाजिक संगठनों को जरूरतमंद परिवारों की आर्थिक मदद, युवाओं को रोजगार दिलाने और सामाजिक न्याय के लिए भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने जरूरतमंद दो परिवारों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी परिवार पर संकट आने पर समाज को उसके साथ खड़ा होना चाहिए। जरूरतमंदों की मदद और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाना सामाजिक एकजुटता की असली पहचान है। बरला निवासी प्रवीण त्यागी ने सम्मेलन को सामाजिक समस्याओं पर केंद्रित बताते हुए कहा कि समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने के लिए इस तरह के कार्यक्रम जरूरी हैं। उन्होंने भविष्य में भी सामाजिक चिंतन से जुड़े आयोजन करने की बात कही। सम्मेलन में सामाजिक सुधार, शिक्षा, आरक्षण, यूजीसी और राजनीतिक भागीदारी जैसे विषयों पर अलग-अलग विचार सामने आए। वक्ताओं ने समाज को संगठित करने, युवाओं को सकारात्मक दिशा देने और अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाकर संसाधनों का उपयोग शिक्षा, रोजगार तथा जरूरतमंदों की सहायता में करने पर जोर दिया।

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