मुजफ्फरनगर। पटेल नगर स्थित श्री आदर्श रामलीला भवन में चल रहे 51वें श्रीरामलीला महोत्सव के तीसरे दिन शनिवार को भगवान श्रीराम सहित चारों भाइयों के जन्म की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। भगवान श्रीराम के जन्म का प्रसंग प्रस्तुत होते ही रामलीला परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। कलाकारों ने अपनी सजीव प्रस्तुति से अयोध्या में जन्मोत्सव की खुशियों और उल्लास का ऐसा दृश्य प्रस्तुत किया कि श्रद्धालु भावविभोर हो गए। राम जन्म की बधाइयों और मंगलगीतों के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
श्री आदर्श रामलीला भवन सेवा समिति, पटेलनगर के तत्वावधान में आयोजित रामलीला मंचन का शुभारंभ मुख्य अतिथि गुरु संत रविदास विश्व महापीठ के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर संदीप खत्री रविदासाचार्य, संजय सिंघल, राम अवतार गोयल, राघव बंसल, अक्षिता बंसल, शुभम सिंघल और शिवानी सिंघल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर समिति के मुख्य प्रबंधक अनिल ऐरन, उनकी पत्नी मीना ऐरन, पुत्रवधू ज्योति ऐरन और सभासद सीमा जैन ने अतिथियों को स्मृति चिह्न एवं मिष्ठान भेंट कर सम्मानित किया। रामलीला की शुरुआत भस्मासुर प्रसंग से हुई। इसके बाद कलाकारों ने भगवान श्री राम के अवतरण की लीला प्रस्तुत की। महाराजा दशरथ के महल में भगवान श्रीराम के जन्म की खुशियां मनाए जाने, मंगलगीत गाए जाने और अयोध्यावासियों की ओर से उत्सव मनाने के दृश्यों ने दर्शकों को त्रेतायुग की अयोध्या का अनुभव कराया। भगवान श्रीराम के साथ भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के जन्म के प्रसंग ने भी श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। राम जन्म की खुशी में कलाकारों ने बधाई गीत प्रस्तुत किए। जय श्रीराम के जयघोष के बीच श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक लीला का आनंद लिया। मंचन में अयोध्या की खुशियों, धार्मिक आस्था और सनातन परंपराओं की सुंदर झलक दिखाई दी। दर्शकों ने कलाकारों के अभिनय और प्रस्तुति की सराहना की। मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर संत संदीप खत्री रविदासाचार्य ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति को आज पुनः रामराज्य जैसा वैभव प्राप्त हुआ है। अयोध्या में श्रीराम धाम पूरे विश्व के लिए एक दिव्य धाम बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि इसके पीछे गोरक्ष पीठ की भूमिका के साथ ही साधु-संतों के संघर्ष और बलिदान को भी याद रखा जाना चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देने और उन्हें सनातन संस्कृति के आदर्शों से परिचित कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों को धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना आवश्यक है, ताकि वे जीवन में मर्यादा, अनुशासन और नैतिकता को महत्व दें। समिति के मुख्य प्रबंधक अनिल ऐरन ने कहा कि भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों का मंचन केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि इनके माध्यम से समाज को धर्म, मर्यादा, कर्तव्य और आदर्श जीवन का संदेश भी मिलता है। भगवान श्रीराम का जीवन प्रत्येक व्यक्ति को सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। रामलीला महोत्सव के संयोजक विकल्प जैन ने बताया कि समिति की ओर से आयोजित इस महोत्सव के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का दर्शन कराया जा रहा है। आयोजन का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाना भी है। उन्होंने कहा कि रामलीला के मंचन से नई पीढ़ी को अपने धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को समझने का अवसर मिलता है। कार्यक्रम के दौरान ललित माहेश्वरी, मनोज सैनी, गीता गुर्जर और नितिन तायल सहित समिति के मुख्य प्रबंधक अनिल ऐरन, विकल्प जैन, जितेंद्र कुच्छल, सुरेंद्र मंगल, विजय मित्तल, प्रमोद गुप्ता, रजनीश मुंजाल, पंकज शर्मा, पीयूष शर्मा, नारायण ऐरन, राकेश बंसल, जितेंद्र नामदेव, राजेश मित्तल सहित अन्य लोग मौजूद रहे।















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