मुजफ्फरनगर। पटेल नगर स्थित श्री आदर्श रामलीला भवन में श्री आदर्श रामलीला भवन सेवा समिति के तत्वावधान में 51वें रामलीला महोत्सव का शुभारंभ धार्मिक उल्लास और भक्तिमय वातावरण में हुआ। पहले दिन नारद मोह लीला का मंचन कर कलाकारों ने पौराणिक प्रसंग को जीवंत कर दिया। लीला के माध्यम से बताया गया कि अहंकार और मोह मनुष्य के विवेक को प्रभावित करते हैं, जबकि विनम्रता और ईश्वर के प्रति समर्पण ही सही मार्ग दिखाते हैं। शुभारंभ अवसर पर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिल देव अग्रवाल, नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप और वरिष्ठ भाजपा नेता गौरव स्वरूप सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
महोत्सव का शुभारंभ मुख्य यजमान एवं समाजसेवी सत्यप्रकाश रेशु ने अतिथियों और गणमान्य लोगों के साथ विधिवत पूजन करके कराया। पूजन की प्रक्रिया पंडित बृजेन्द्र मिश्रा ने संपन्न कराई। इसके बाद मुख्य अतिथि कपिल देव अग्रवाल, पालिकाध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप और गौरव स्वरूप ने फीता काटकर तथा दीप प्रज्ज्वलित कर रामलीला मंचन का उद्घाटन किया। समिति के मुख्य प्रबंधक अनिल ऐरन और उनकी धर्मपत्नी मीना ऐरन ने कमेटी के पदाधिकारियों के साथ अतिथियों को मिष्ठान और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। रामलीला के प्रथम दिन नारद मोह का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। पौराणिक कथा के अनुसार, नारद मुनि कठोर तपस्या में लीन हो जाते हैं। उनकी तपस्या से चिंतित देवराज इंद्र कामदेव को उनकी साधना भंग करने के लिए भेजते हैं, लेकिन कामदेव सफल नहीं हो पाते। अपनी तपस्या की सफलता के बाद नारद मुनि के मन में अहंकार उत्पन्न हो जाता है। वह अपनी उपलब्धि का वर्णन भगवान शिव और भगवान विष्णु के समक्ष करते हैं। इसके बाद भगवान विष्णु अपनी माया से ऐसी लीला रचते हैं, जिसमें नारद मुनि मोहग्रस्त हो जाते हैं। एक स्वयंवर में राजकुमारी को प्राप्त करने की इच्छा से वह भगवान विष्णु से सुंदर रूप मांगते हैं, लेकिन उन्हें वानर रूप प्राप्त होता है। स्वयंवर में राजकुमारी उनका वरण करने के बजाय भगवान विष्णु को वरमाला पहना देती हैं। इस घटना से क्रोधित होकर नारद मुनि भगवान विष्णु को पत्नी वियोग में धरती पर कष्ट सहने का श्राप देते हैं। कथा के अनुसार, इसी प्रसंग से भगवान विष्णु के धरती पर अवतार का मार्ग प्रशस्त होता है। बाद में नारद मुनि को अपनी भूल और मोह का बोध होता है। कलाकारों ने पारंपरिक संवादों और प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से इस प्रसंग को मंच पर साकार किया। दर्शकों ने श्रद्धापूर्वक लीला का आनंद लिया। राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, मर्यादा, संस्कार और सामाजिक एकता का उत्सव है। भगवान श्रीराम के जीवन से मिलने वाली शिक्षाएं समाज को नैतिकता और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को समझने का अवसर मिलता है। नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप ने कहा कि प्रभु श्रीराम की पावन लीला सत्य, धर्म और सदाचार का संदेश देती है। उनके आदर्शों को जीवन में अपनाकर समाज में अच्छे संस्कारों और सकारात्मक मूल्यों को मजबूत किया जा सकता है। वरिष्ठ भाजपा नेता गौरव स्वरूप ने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्श जनसेवा, कर्तव्यनिष्ठा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। रामलीला समिति के मुख्य प्रबंधक अनिल ऐरन ने कहा कि नारद मोह की लीला मनुष्य को अपनी उपलब्धियों पर अहंकार नहीं करने और मोह से दूर रहने की सीख देती है। व्यक्ति को सदैव विनम्रता बनाए रखते हुए अपने विवेक और कर्तव्य को प्राथमिकता देनी चाहिए। संयोजक विकल्प जैन ने कहा कि 51वें रामलीला महोत्सव के शुभारंभ के साथ ही क्षेत्र में धार्मिक उल्लास का वातावरण बन गया है। आयोजन का उद्देश्य भगवान श्रीराम के आदर्शों, भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाना है। कार्यक्रम में राजीव गर्ग, धर्मेंद्र नीटू, मनीष कपूर, डीके जैन, अशोक गर्ग, प्रेम प्रकाश अरोड़ा और कथावाचक चिरायु गालव सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। आयोजन को सफल बनाने में मुख्य प्रबंधक अनिल ऐरन, विकल्प जैन, जितेंद्र कुच्छल, सुरेंद्र मंगल, विजय मित्तल, प्रमोद गुप्ता, रजनीश मुंजाल, पंकज शर्मा, पीयूष शर्मा, नारायण ऐरन, राकेश बंसल, जितेंद्र नामदेव, राजेश मित्तल, मनोज पाटिल, अंशुल गुप्ता, ऋषभ जैन, अमर चौधरी, प्रदीप बॉबी, विपिन जैन, हरिओम मास्टर, आकाश गोयल, सोनू सिंह, विपुल मोहन, यश गर्ग, प्रियांशु, शिवांश ठाकुर, कृष्णा नामदेव, स्पर्श गर्ग और विवेक सिंघल सहित समिति के पदाधिकारियों एवं कलाकारों का योगदान रहा। रामलीला के शुभारंभ पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
















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