मुजफ्फरनगर। विजयादशमी के पर्व को लेकर शहर के नुमाइश मैदान में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मैदान में बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक रावण, कुंभकरण और मेघनाद के विशाल पुतले तैयार कर खड़े किए गए हैं। मंगलवार को श्रीराम के हाथों इन पुतलों का दहन किया जाएगा। इस बार दशहरा उत्सव में एक खास बदलाव भी देखने को मिलेगा। हर वर्ष बुराई के प्रतीक के रूप में बनाए जाने वाले पुतले की जगह इस बार कॉकरोच नाम का एक अनोखा पुतला तैयार किया गया है। यह पुतला समाज में फैली बुराइयों और उन प्रवृत्तियों पर प्रहार करने के उद्देश्य से लगाया गया है, जो सामाजिक व्यवस्था को कमजोर कर रही हैं।
नुमाइश मैदान में दशहरा पर्व को लेकर लोगों में उत्साह का माहौल है। विशाल पुतलों को अंतिम रूप देकर मैदान में स्थापित कर दिया गया है। रावण का पुतला 60 फुट ऊंचा बनाया गया है, जबकि कुंभकरण का पुतला 55 फुट और मेघनाद का पुतला 50 फुट ऊंचा है। तीनों पुतले अपनी भव्यता के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। दशहरा उत्सव के दौरान इन पुतलों का दहन कर भगवान श्रीराम की विजय और अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश दिया जाएगा। दशहरा पर्व पर हर वर्ष रावण, कुंभकरण और मेघनाद के साथ बुराई के प्रतीक के रूप में एक अतिरिक्त पुतला भी लगाया जाता रहा है, लेकिन इस बार आयोजकों ने इसमें बदलाव करते हुए कॉकरोच नाम का पुतला तैयार कराया है। यह बदलाव लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कॉकरोच के पुतले के माध्यम से समाज में व्याप्त बुराइयों और गलत प्रवृत्तियों के प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया है। दशहरा केवल पुतलों के दहन का पर्व नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर मौजूद बुराइयों को समाप्त करने का संकल्प लेने का अवसर भी है। रावण का दहन अहंकार, अन्याय और अधर्म के अंत का प्रतीक माना जाता है। इसी संदेश को व्यापक रूप देने के उद्देश्य से इस बार कॉकरोच के पुतले को भी उत्सव का हिस्सा बनाया गया है। इसका मकसद लोगों को यह समझाना है कि समाज में फैली बुराइयों को समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास और सकारात्मक सोच जरूरी है। नुमाइश मैदान में मंगलवार को आयोजित होने वाले दशहरा उत्सव में भगवान श्रीराम के हाथों रावण, कुंभकरण, मेघनाद और कॉकरोच के पुतलों का दहन किया जाएगा। पुतलों के दहन के साथ ही बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाएगा। विजयादशमी का पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर माता सीता को उसकी कैद से मुक्त कराया था। तभी से दशहरे पर रावण दहन की परंपरा चली आ रही है। शहर के नुमाइश मैदान में तैयार किए गए विशाल पुतलों और इस बार कॉकरोच के रूप में किए गए अनूठे प्रयोग ने दशहरा उत्सव को खास बना दिया है। अब लोगों को मंगलवार को होने वाले पुतला दहन का इंतजार है। उत्सव के माध्यम से जहां धार्मिक परंपरा का निर्वहन किया जाएगा, वहीं समाज को बुराइयों से मुक्त करने और अच्छे विचारों को अपनाने का संदेश भी दिया जाएगा।













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