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‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ से गूंजा पितृकृपा

मुजफ्फरनगर। बघरा क्षेत्र के ग्राम जलालपुर स्थित श्री पितृदेव स्थान पर आयोजित ‘पितृकृपा’ श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के चौथे दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और नंदोत्सव धूमधाम से मनाया गया। कथा पंडाल में हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग सुनाया गया तो पूरा वातावरण भक्ति और उल्लास से सराबोर हो गया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाते हुए जन्मोत्सव की खुशी मनाई।
श्रीमद्भागवत कथा का वाचन श्री राम कृपा धाम, हरिद्वार की परम पूज्या साध्वी डॉ. विश्वेश्वरी देवी ने किया। उन्होंने नरसिंह और वामन अवतार के प्रसंगों के माध्यम से भक्त के अटूट विश्वास और भगवान की कृपा का महत्व बताया। कथा के दौरान अजामिल प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान का नाम ही जीव के उद्धार का प्रमुख आधार है। कलियुग में नाम-स्मरण का विशेष महत्व है। श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान का नाम लेने से मनुष्य पवित्रता और कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ता है। भक्त प्रह्लाद के प्रसंग में साध्वी ने कहा कि असुर कुल में जन्म लेने के बावजूद प्रह्लाद अपनी अटूट भक्ति और विश्वास के कारण श्रेष्ठ भक्तों में शामिल हुए। जब उनके पिता हिरण्यकश्यप ने उन्हें अनेक प्रकार से प्रताड़ित किया, तब भी उनकी भगवान के प्रति आस्था नहीं डिगी। भक्त की रक्षा के लिए भगवान ने नरसिंह रूप में प्रकट होकर हिरण्यकश्यप का वध किया। इस प्रसंग के माध्यम से भगवान और भक्त के बीच अटूट विश्वास का संदेश दिया गया। वामन अवतार की कथा में राजा बलि के समर्पण और भक्ति का वर्णन किया गया। साध्वी ने बताया कि भगवान वामन ने राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी और तीन पग में समस्त लोक नाप लिए। राजा बलि की भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें सुतल लोक का राज्य प्रदान किया। कथा के दौरान श्रीराम अवतार के माध्यम से मर्यादा और आदर्श जीवन का संदेश दिया गया, जबकि श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं के माध्यम से जीवन में प्रेम, भक्ति और धर्म के महत्व को समझाया गया। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। पितरों के निमित्त आयोजित ‘पितृकृपा’ महोत्सव में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव ने पूर्वजों के स्मरण और प्रभु भक्ति को एक साथ जोड़ दिया। समस्त सिंघल परिवार की ओर से आयोजित इस धार्मिक आयोजन का उद्देश्य पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ उनके संस्कारों और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। इस अवसर पर आचार्य गोस्वामी श्रीहित नवनीत लाल शरण जी महाराज, अरविंद बंसल मिर्ची वाले, श्रीमती सपना कश्यप सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए और नंदोत्सव में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

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