मुजफ्फरनगर। भारतीय योग संस्थान की ओर से योग दिवस के अवसर पर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न योग केंद्रों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान साधकों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास कराया गया। वक्ताओं ने योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा को जोड़ने की साधना है। नियमित योगाभ्यास से शरीर मजबूत और लचीला बनने के साथ मन को भी शांति मिलती है।
गांधी कॉलोनी स्थित राणा सीमेंट योग केंद्र पर आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ राणा जी ने दीप प्रज्वलित कर किया। ममता, शिखा और रेखा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इसके बाद अल्पना ने साधकों को पद्मासन, गहरी एवं लंबी श्वास, ओम की दीर्घ ध्वनि तथा गायत्री मंत्र का व्यवस्थित अभ्यास कराया। मनीषा और ममता ने ताड़ासन व अर्धचक्रासन का अभ्यास कराया, जबकि शिखा ने वज्रासन और उष्ट्रासन का प्रदर्शन किया। सुरेंद्र जी ने साधकों को अनुलोम-विलोम प्राणायाम कराया। मोहनलाल जी ने भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास कराया। कार्यक्रम में बताया गया कि योग भारतीय संस्कृति की प्राचीन परंपरा है। योग का अर्थ जोड़ना है और इसके माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर की शक्ति से जुड़ने का प्रयास करता है। नियमित योग करने से शरीर स्वस्थ, मजबूत और लचीला रहता है तथा मन को शांति मिलती है। योग तनाव कम करने और जीवनशैली को संतुलित रखने में भी सहायक है। कार्यक्रम में समाज सेवी ममता अग्रवाल, रंजनी फुटेला, मनीषा, नीरज राणा, योगाचार्य ज्ञानचंद, भावना, रेखा समेत बड़ी संख्या में साधक मौजूद रहे।
बालिका इंटर कॉलेज गांव पिनना में भारतीय योग संस्थान के 60वें योग दिवस समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संस्थान के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य एवं जनपद प्रभारी योगाचार्य सुरेंद्र पाल सिंह आर्य ने योग के महत्व पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में योग का विशेष महत्व है। योग स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने की एक प्रभावी पद्धति है। उन्होंने कहा कि गांवों में लोग खेतों और अन्य शारीरिक कार्यों में मेहनत करते हैं, लेकिन शारीरिक श्रम और योगाभ्यास में अंतर है। नियमित योगाभ्यास से शरीर के विभिन्न आंतरिक अंग सक्रिय होते हैं और शरीर की प्रणालियां बेहतर ढंग से कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि योगाभ्यास से पाचन और निष्कासन की प्रक्रिया सुचारू रहने में सहायता मिलती है। शरीर स्वस्थ, सुडौल और लचीला रहता है। योगाचार्य सुरेंद्र पाल सिंह आर्य ने कहा कि योगाभ्यास का उद्देश्य केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। योग के माध्यम से व्यक्ति आत्मचिंतन और आत्मज्ञान की दिशा में आगे बढ़ता है। अपने वास्तविक स्वरूप को जानना और परमपिता परमेश्वर से आत्मसाक्षात्कार करना योग की साधना का अंतिम लक्ष्य माना गया है। साधकों को कराया विभिन्न आसनों और प्राणायाम का अभ्यास
कार्यक्रम की शुरुआत केंद्र प्रमुख प्रदीप मलिक ने ओम ध्वनि और गायत्री मंत्र के साथ कराई। क्षेत्रीय प्रधान नीरज बंसल ने ताड़ासन, तिर्यक ताड़ासन, त्रिकोणासन, अश्वस्थासन तथा विभिन्न सूक्ष्म क्रियाओं का अभ्यास कराया। क्षेत्रीय मंत्री डॉ. अक्षय बालियान ने वज्रासन, उष्ट्रासन, मंडूकासन और सिंह गर्जना आसन करवाए। केंद्र प्रमुख ग्रीनलैंड स्कूल कविंद्र बालियान ने भुजंगासन और शलभासन का अभ्यास कराया। क्षेत्रीय प्रधान रामपाल शर्मा ने उत्थान पाद हस्तासन और शवासन करवाया। क्षेत्रीय मंत्री वेद प्रकाश ने हास्यासन कराया। जिला मंत्री राजीव रघुवंशी ने अनुलोम-विलोम, कपालभाति और भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास कराया। उन्होंने कहा कि आसनों से शरीर स्वस्थ, सुडौल और लचीला बनता है, जबकि प्राणायाम मन को शांत रखने में सहायक है। इसके बाद योगाचार्य सुरेंद्र पाल सिंह आर्य ने साधकों को ध्यान योग कराया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने विभिन्न योग क्रियाओं में उत्साहपूर्वक भाग लिया। योग के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से गांव पिनना की गलियों और शामली रोड पर जनजागरण प्रभात फेरी निकाली गई। प्रभात फेरी में ‘करो योग, रहो निरोग’, ‘योगं शरणं गच्छामि’, ‘जो जागत है सो पावत है, जो सोवत है सो खोवत है’, ‘योग करेंगे और करवाएंगे, सबको स्वस्थ बनाएंगे’ तथा ‘भारतीय योग संस्थान जिंदाबाद’ जैसे नारों से लोगों को नियमित योग के लिए प्रेरित किया गया। प्रभात फेरी में बड़ी संख्या में संस्थान के पदाधिकारियों, साधकों और गणमान्य लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम संयोजक प्रवीण कुमार, डॉ. जीत सिंह तोमर, धर्मेंद्र प्रधान, रतन सिंह, वीर सिंह, अंकित गर्ग, जिला बार संघ मुजफ्फरनगर के पूर्व महासचिव एवं एडीजीसी अरुण कुमार शर्मा एडवोकेट, संजीव चौधरी, मनोज चौधरी, देवेंद्र बालियान, यशपाल बरवाला, जिला संगठन मंत्री कुलदीप मित्तल, देवेंद्र मलिक, मनोज कुमार और कमल चौधरी समेत अन्य लोग मौजूद रहे। अंत में वैदिक प्रार्थना और शांति पाठ कराया गया। इसके बाद प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।












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