मुजफ्फरनगर। खतौली में रिश्तों की संवेदनशीलता और इंसानियत की मिसाल सामने आई है। पति की मौत के बाद विधवा हुई बहू को अकेला छोड़ने के बजाय सास ने उसे बेटी का दर्जा देकर उसका घर दोबारा बसाने का फैसला लिया। सास ने बहू के लिए नया जीवनसाथी तलाशा और बुधवार को आर्य समाज मंदिर में उसका विवाह कराया गया। विवाह के दौरान देवर ने बड़े भाई की जिम्मेदारी निभाते हुए अपनी भाभी का कन्यादान किया।
हरिद्वार निवासी मीनाक्षी की करीब 10 वर्ष पहले खतौली निवासी रोहित से शादी हुई थी। दंपती की दो बेटियां रितु और अविका हैं। कुछ समय पहले रोहित ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इसी बीच ससुर ओमपाल की भी कैंसर के कारण मौत हो गई। पति और ससुर की मौत के बाद मीनाक्षी के सामने अपनी दोनों बेटियों की परवरिश और भविष्य की जिम्मेदारी आ गई। मुश्किल समय में सास सुनीता ने बहू का साथ नहीं छोड़ा। उन्होंने मीनाक्षी को बहू के बजाय बेटी मानते हुए उसके भविष्य के बारे में सोचा और उसकी दूसरी शादी कराने का निर्णय लिया। परिवार ने राजस्थान के नारायणपुर निवासी योगेश को मीनाक्षी के लिए जीवनसाथी के रूप में चुना। योगेश चाय की दुकान चलाते हैं। परिवार की सहमति के बाद बुधवार को आर्य समाज मंदिर में मीनाक्षी और योगेश का विवाह कराया गया। विवाह समारोह सादगी के साथ संपन्न हुआ, लेकिन इस दौरान मौजूद लोगों के लिए सबसे भावुक क्षण वह रहा, जब मीनाक्षी के देवर मोहित ने अपनी भाभी का कन्यादान किया। जिस घर में मीनाक्षी करीब एक दशक पहले बहू बनकर आई थी, उसी घर से सास ने उसे बेटी की तरह विदा किया। विदाई के समय परिवार और मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। सास सुनीता ने बहू को नई जिंदगी की शुरुआत के लिए आशीर्वाद दिया। यह विवाह केवल दो लोगों के जीवन को जोड़ने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि परिवार की उस सोच को भी सामने लाया, जिसमें विधवा बहू को जीवनभर अकेले रहने के बजाय उसकी इच्छा और भविष्य को महत्व दिया गया। मीनाक्षी की दोनों बेटियों रितु और अविका के भविष्य को लेकर भी परिवार ने व्यवस्था की है। परिवार के अनुसार, दोनों बेटियों में से एक बेटी अपनी दादी के पास रहेगी, जबकि दूसरी बेटी अपनी मां मीनाक्षी के साथ जाएगी। इस तरह परिवार ने बेटियों की जिम्मेदारी को भी ध्यान में रखते हुए आगे की व्यवस्था की है। खतौली में हुई इस शादी की चर्चा आसपास के क्षेत्र में भी रही। लोगों ने सास सुनीता और देवर मोहित के इस फैसले को रिश्तों में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का उदाहरण बताया।












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