मुजफ्फरनगर। हरेटी गांव के रोहन राठी हत्याकांड को लेकर भाकियू से जुड़े किसानों ने बुधवार को एसएसपी कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया। पुलिस का मकसद पहले गेट बंद कर किसानों को एसएसपी ऑफिस से बाहर रोकने का था, लेकिन आक्रोशित किसान जबरन पुलिस ऑफिस में प्रवेश कर धरने पर बैठ गएं। दिन भर नारेबाजी और भाषण बाजी के बीच पुलिस के खुलासे पर सवाल पर सवाल खड़े किए गए। उनका कहना था कि हत्याकांड की सीबीआई से जांच कराई जाए, ताकि पूरा सच बाहर आ सके।
पुरकाजी थाना क्षेत्र के हरैटी गांव के ग्राम प्रधान विवेक राठी के बेटे रोहन राठी की 24 सितंबर को हत्या कर दी गई थी। राठी का शव गांव के जंगल में खेत के पास मिला था। पुलिस ने 48 घंटे में ही हत्याकांड का अनावरण करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। परिवार और ग्रामीण पुलिस के खुलासे से संतुष्ट नहीं हुए और उन्हें ढेर सारे सवाल उठाए। मामला गरमाया तो एसपी सिटी अमृत जैन के नेतृत्व में छह सदस्यीय समिति गठित की गई। एसआईटी लखनऊ से मेडिकोलीगल टीम को बुलाकर साक्ष्य जुटाने के लिए सीन रीक्रिएशन की कार्रवाई कराई। फिर भी राठी परिवार की शंकाएं दूर नहीं हो पाई। भारतीय किसान यूनियन और ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन को चेतावनी दी थी कि यदि उन्हें जांच और कार्रवाई से संतोष नहीं हुआ तो एसएसपी कार्यालय पर धरना दिया जाएगा।
भाकियू की घोषणा के अनुरूप सुबह से किसानों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। पुलिस ने भी किसानों को रोकने के लिए व्यापक तैयारी की थी। कचहरी गेट के बाहर टैªक्टरों को रोकने के लिए कई वाहन खड़े करने के साथ पर्याप्त संख्या में पुलिस बल लगाया गया था। एक बार गेट बंद करके भाकियू के रणबांकुरों को रेाकने की कोशिश की गई, लेकिन वो जबरन घुस गए। इस दौरान किसानों और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी झड़पें हुई। इसके बाद तो भाकियू के धरने में किसानों की संख्या बढ़ती चली गई।













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